गहराई से सोचा मैंने
क्या चाहता हूँ ज़िन्दगी से
आवाज़ गूंजी इस जनम में
सबसे आगे सबसे बेहतर
जहाँ कोई भूखा न हो
जहाँ कुछ खुदगर्ज़ लोगों ने
मेरे लोगों से छीना न हो
सर उठा कर गर्व से कहने का एहसास
चाहता हूँ मैं कहना ललकार के यह आज
हाँ, मैं हूँ इंडियन
रहता हूँ मैं वहां,
बहती हैं नदियाँ
लहलहाते खलियान
हाँ, मैं हूँ इंडियन
जहाँ शिक्षा है समान
थाने में बेबस
कोई पहुंचे जो इंसान
दरोगा जी एलर्ट हो कर इज्ज़त से कहें
May I Help You ,Sir
गहराई से सोचा मैंने
क्यों पीछे रह गए हमअपनों ने छीना हमसे
गैरों मैं कहाँ था दम
सबसे आगे सबसे बेहतर
देंगे अगली पीढ़ी को
देखना एक दिन ओलंपिक में
सबसे ज्यादा मेडल जीतेंगे हम
होगा सर उठा गर्व से
कहने का एहसास
चाहता हूँ मैं कहना
ललकार के यह आज
हाँ, मैं हूँ इंडियन
रहता हूँ मैं वहां ,
जहाँ की दौलत
स्विस बैंक में न जमा
हाँ, मैं हूँ इंडियन
पब्लिक जब जग जाए
अब बूढ़े दादा
जब पेंशन लेने जाएँ
बड़े बाबू एलर्ट हो कर इज्ज़त से कहें
May I Help You ,Sir
गहराई से सोचा मैंने
लालच जब छोड़ेंगे हम
बरसेंगी खुशियाँ
सबसे आगे होंगे हम
आओ मिलकर
कर दें सपना पूरा
May I Help You, Sir
- सुमित अगरवाल

No comments:
Post a Comment